बीकानेर प्रदेश को पोलियो मुक्त करवाने के लिए चलाए जा रहे पल्स पोलियो राष्ट्रीय अभियान के दूसरे चरण के प्रति लोगों का रुझान कम होता जा रहा है। अभियान के दौरान जिले में निर्धारित किए गए लक्ष्य के मुकाबले आधे बच्चे भी पोलियो बूथों पर दवा पीने के लिए नहीं पहुंचे। हालांकि अभियान में जुटे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी लक्ष्य को पूरा करने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आज और कल घर-घर जाकर पोलियों की दवा पिलाएंगे। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में दो दिन घर-घर जाकर पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। पल्स पोलियो के गत राष्ट्रीय अभियान के दौरान भी पोलियो बूथ पर जाकर दवा पीने वाले बच्चों की संख्या का आंकडा पचास फीसदी को नहीं छू पाया था।चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पल्स पोलियो राष्ट्रीय अभियान के लिए जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 4.१॰ लाख बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके लिए पूरे जिले में 1487 पोलियो बूथ बनाए गए। जिले में आवश्यकता अनुसार कच्ची बस्ती, औद्योगिक क्षेत्रों व दुरूस्थ गांवों के लिये ट्रांजिट टीमें बनाई गई। इसके लिए 66oo अधिकारियों-कर्मचारियों को पल्स पोलियो अभियान में ड्यूटी लगाई गई। नर्सिंग छात्रों को भी इस अभियान में दवा पिलाने के लिए लगाया गया। हालांकि अधिकारिक सूत्रों ने तो अभियान को 6o फीसदी सफल बताया है, लेकिन कागजी आंकडों से हकीकत काफी दूर है। वास्तव में तो 4o प्रतिशत बच्चे भी पोलियो की खुराक नहीं गटक पाये। निर्धारित किए गए लक्ष्य के मुकाबले आधे से कम बच्चे भी पोलियो की दवा पीने के लिए बूथों पर नहीं पहुंचे।
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