दीपावली पर बंदनवार करती है विशेष आकर्षित
14 Oct
2009
आर्ट पंसन्द महिलाएं अपने हाथ से डिजाइन्स बनाती है, बाजार मे भी ढेरों डिजाइने उपलब्ध
बीकानेर, धन की देवी लक्ष्मी को साधने के लिए घरों और प्रतिष्ठानों को सजाने के नये नये आईटम आफ इंतजार मे है। आधुनिकता की दौड मे आर्टिफिशियल चीजों की भी मांग बढ गयी है। खासकर आज की गृहणियों की पंसद भी कुछ खास है। वे जमाने के साथ कदम से कदम मिलकार जो आगे बढ रही है। दीपावली के अवसर पर सजावटी सामान विक्रेताओं के यहां भीड बढती जा रही है। इस बार सजावटी सामानों मे आर्टिफिशियल मालाएं, स्टीकर युक्त रंगोली, स्वास्तिक, लक्ष्मीजी के पैर, मैनिक बॉल (क्रिस्टल बॉल) के साथ विशेष आकर्षण रखने वाली बंदनवार। “बंदनवार” जिसे घर के मुख्य द्वार या स्वागत द्वार पर लगाया जाता है वहीं मालाओं को अन्य जगहों पर सजावट के रूप मे काम मे लिया जाता है। बंदनवार बडी कलात्मकता के साथ कपडे, लकडी, कांच के छोटे टुकडे, लकडी प्लास्टिके छल्ले, स्वास्तिक, गणेशजी, लक्ष्मीजी, शुभ लाभ, वेलकम लिखित प्लास्टिक आइटमों के उपयोग करते हुए बनाई जाती है। कुछ हैण्डीक्राफ्ट शौकीन महिलाएं जहां यह सामान घर मे लाकर खुद अपनी डिजाइन से बनाती है वहीं बनी बनाई ढेरों नयी डिजाइने बाजार मे उपलब्ध है। जहां यह सब आइटम पहले ग्रामीण महिलाएं बनाती थी वहीं अब बडे बडे कारखाने इनको बनाने मे लगे है इतना ही ये सब वस्तुएं तो आजकल चाइना से इंर्पोट भी होने लगी है। बाजार मे सामान्य बंदनवार 20 रूपये मिल जाती है वहीं क्रिस्टल ऊन से बनी बंदनवार 90 रूपए से लेकर 250 मे मिलती है। इनमे कलश, गणेशजी, लक्ष्मीजी, मध्य मे लगे हुए होते है और किनारों पर कांच और लकडी के बने छल्ले लगाकर आकर्षित कर दिया जाता है। बन्दनवार के अलावा आजकल वास्तु के आधार पर बनी मैजिक बॉल ”क्रिस्टल बॉल“ की भी खासी डिमांड बनी हुई है। यह बॉल दिखने मे मोती जैसी छोटी होती है, मगर पानी मे डालने पर महज छः घन्टों मे ही इनका आकार कांच की गोली जितना बडा हो जाता है। वास्तुकार कहते है इसे घर पर रखने से वास्तुदोष दुर होता है।
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