युवा अवस्था में चार बार हज करने का मौका मिला और चारों बार भारतीय चिकित्सा दल के मुख्य संयोजक के तौर पर सेवाऍं दी।
भ्रष्टाचार से सीधा सामना हुआ और राज्य स्तरीय सम्मान के लिए तीस प्रतिशत की मांग की गई।
१५ अगस्त २००४ को बीकानेर के जिला प्रशासन द्वारा श्रेष्ठ डॉक्टर के रूप में करणीसिंह स्टेडियम में सम्मानित हुए।
डॉ बी डी कल्ला के हाथों से बीकानेर रत्न अवार्ड मिला।
विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय समय पर सम्मान समारोह।
चिकित्सा का क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र है जहां मानव सेवा का मौका काम के साथ मिल जाता ह। मानव मात्र की सेवा करना ही इस जीवन का उद्देश्य है यह समझकर किया गया सेवा का यह काम जरूर फलीभूत होता है। इसी सोच के साथ बीकानेर का एक युवक इस पेशे में आया और आज उसने इस पेशे में एक मुकाम हासिल किया ह यह शख्स है डॉ मौहम्मद अबरार पँवार। माता पिता की मर्जी व अपने शौक ने अबरार साहब को डॉक्टरी पेशे की ओर आकर्षित किया और आज मन से इस सेवा के काम में जुटे हैं। आईए बातचीत करते हैं डॉ अबरार पॅवार से
डॉक्टर अबरार पँवार ने इस युवा आयु में चार बार हज यात्रा की है और चारों बार ही इन्हें भारतीय चिकित्सा दल का मुख्य संयोजक बना कर हज भेजा गया जहां जाकर सुकुन तो मिला ही साथ ही सेवा का जो मौका मिला वह यादगार रहेगा। भारत सरकार का विदेश मंत्रालय इस दल का गठन करता है और इसी विभाग ने इस उत्साही, युवा व ऊर्जावान चिकित्सक को इस दल के मुख्य संयोजक के तौर पर चुना जो गर्व की बात है।
पिता की इच्छा थी कि बेटा डॉक्टर बने और अबरार पॅवार को भी डॉक्टर बनने की तमन्ना थी। माता पिता के आशीर्वाद से पी एम टी में सलेक्शन हुआ। डॉक्टर साहब बताते हैं कि अपने पहले प्रयास में उन्हें सफलता मिली लेकिन एक पशु चिकित्सक के रूप में लेकिन अबरार पँवार के मन में था मानव की सेवा करना और इसी आशा के साथ अपने दूसरे प्रयास में इन्हें बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया और यहीं से शुरू हुआ चिकित्सा जगत में अबरार पँवार का प्रवेश। सन् १९९४ में डॉक्टर अबरार अहमद ने चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश किया और एक डॉक्टर के रूप में अपनी सेवाऍं देनी शुरू की। इसी कार्य के दौरान बीकानेर के नत्थूसर गेट के बाहर स्थित छः नम्बर डिस्पेंसरी में अबरार साहब की नियुक्ति हुयी और यहाँ उन्होंने जिंदगी के कईं अनुभव लिए। यहां पर रहते हुए डॉक्टर अबरार पँवार ने अपनी यह छवि सेवाभाव से ऐसी बनाई कि जब इनका स्थानांतरण नोखा किया गया तो स्थानीय लोगों ने भारी विरोध किया और सरकार को इन्हें वापिस बीकानेर के इसी क्षेत्र में स्थित तीन नम्बर डिस्पेंसरी में नियुक्त करना पडा। विश्वकर्मा गेट के अंदर स्थित इस डिसपेंसरी में जब आप प्रवेश करेंगे तो यहां पर रोगियों की भीड स्वतः बताएगी कि इस शख्स पर कितना भरोसा किया जाता है। लोग इन्हें डॉक्टर के रूप में भगवान मानते हैं और यह मन में रहता है कि अगर एक बार डॉक्टर साहब ने देख लिया तो जरूर ठीक हो जाएंगे। वैसे डॉक्टर अबरार पँवार बचपन से ही सेवा भावी रहे हैं और सामाजिक सरोकार से जुडे मुद्दों पर काम करते रहे हैं। पिछले बारह सालों से इस पेशे से जुडे डॉक्टर अबरार पँवार ने अपने सेवाकाल मे कईं निःशुल्क शिविर आयोजित किए हैं जिसमें मरीजों की भीड रहती है और हजारों मरीजों ने इस दौरान लाभ प्राप्त किया है जिसमें कईं गंभीर बीमारियों से जुडे मामले भी शामिल थे।
इस शिविर से जुडी कुछ रोचक बातें बताते हुए अबरार साहब बताते हैं कि राजकीय सीटी डिस्पेंसरी नम्बर छः में कभी भी कोई निःशुल्क शिविर नहीं लगे थे और तत्कालीन जिलाधीश आलोक जी ने उन्हें फोन पर कहा कि इस बार इस डिस्पेंसरी में शिविर लगने चाहिए और सौ के करीब नसबंदी ऑपरेशन करने को कहा। बकौल डॉक्टर साहब एक बार तो उन्हें यह बात मुश्किल लगी लेकिन बाद में शिविर की समाप्ति पर डेढ सौ ऑपरेशन कर एक रिकार्ड कायम किया। इसी कारण मार्च २००४ में इन्हें जिला स्तर पर सम्मानित किया गया। इसी प्रयास के कारण जब स्टेट स्तर पर सम्मान करने की बात आयी तो डॉक्टर अबरार पँवार को एक अजीब घटना से रूबरू होना पडा। घटना यह थी कि इस राज्य स्तरीय पुरूस्कार स्वरूप इन्हें एक लाख रूपये नकद और एक अभिनन्दन पत्र प्राप्त होना था। डॉक्टर साहब को उस समय अजीब लगा जब इनके उच्च अधिकारियों ने तीस प्रतिशत की मांग की और यह बात न स्वीकार करने पर ईनाम नहीं मिलने की बात कही। डॉक्टर अबरार पँवार ने इस बात के लिए अपने उच्च अधिकारियों को यह कहते हुए मना कर दिया कि उनके संस्कार में यह बात नहीं है इसलिए वे ऐसा नहीं करेंगे। और इसी ईमानदारी के कारण डॉक्टर अबरार पँवार को वह पुरूस्कार नहीं मिला। यह घटना डॉक्टर साहब बताते हैं कि उनके लिए काफी दुःखदायी थी और इससे भ्रष्टाचार के विरूद्ध लडने की एक और वजह मिल गयी। डॉक्टर अबरार पॅवार को जब हमने पूछा कि आप युवाओं को क्या संदेश देना चाहेंगे तो उन्होंने कहा कि अगर युवा ईमानदारी, लगन और मेहनत से काम करें तो सफलता जरूर हासिल होती है। डॉक्टर साहब ने कहा कि मानव मात्र की सेवा करने से काफी संतोष मिलता है और एक जरूरतमंद आदमी की सेवा करने से जो सुख मिलता है वैसा सुख और कहीं नहीं मिलता।