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RSS Friday, September 03, 2010




History

बीकानेर स्थापना दिवस

उत्सव हमारी संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीयता की अमूल संपदा है व धरोहर है जिन्हें हम युगों-युगों तक अक्षुण्य बनाये रखने का सतत प्रयास करते है। बीकानेर की स्थापना का उत्सव बीकानेर की थाती साम्प्रदायिक सद्भाव, आपसी भाई चारे का उत्सव है। इस उत्सव में हिन्दू, मुस्लिम, सिख व ईसाई सभी धर्म मजहबों के लोग समान भागीदारी निभाते हैं तथा पतंगबाजी कर खुशियां मनाते है वे बिना किसी धर्म, जाति व वर्ग का भेद किए नई मटकी छानते है, खींचडा तथा इमली का रस बनाते हैं। बीकानेर नगर की स्थापना वर्ष १४८८ को मई माह में राव...

कौन था नास्त्रेदमस?

बहुत कम लोग जानते होंगे कि नास्त्रेदमस केवल भविष्यवक्ता ही नही, डॉक्टर और शिक्षक भी थे। भविष्य के गर्भ मे छिपी बातों को हजारों साल पहले घोषणा करने वाले मशहूर भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस का जन्म १४ दिसंबर १५०३ को फ्रांस के एक छोटे से गांव सेंट रेमी मे हुआ। उनका नाम मिशेल दि नास्त्रेदमस था बचपन से ही उनकी अध्ययन मे खास दिलचस्पि रही और उन्होनें लैटिन, यूनानी और हीब्रू भाषाओं के अलावा गणित, शरीर विज्ञान एवं ज्योतिष शास्त्र जैसे गूढ विषयों पर विशेष महारत हासिल कर ली। नास्त्रेदमस ने किशोरावस्था से ही भविष्यवाणियां करना शुरू कर दी...

सुशासन बनाम भ्रष्टाचार - प्राचिन भारतीय दृष्टिकोण - विशेषतः कौटिल्य ’अर्थशास्त्र‘ के सन्दर्भ में

सुशासन अर्थात "Good Governance" का अर्थ अच्छी नीति का निर्माण और उनका कुशल कार्यान्वियन होता है। सुशासन वर्तमान शब्दावलि है लेकिन यह तबसे चला आ रहा है जबसे मानव समाज का विकास हुआ है। सुशासन को महात्मा गांधी ने रामराज्य के आदर्भ राज्य के रूप में परिभाषित करने का प्रयास किया था। गांधीजी का यह कथन है कि, ’’हम राज्य को रामराज्य तभी कह सकते हैं जब राजा और प्रजा दोनों सरल हो, जब राजा और प्रजा दोनों के हृदय पवित्र हों, जब दोनों त्यागवृत्ति रखते हों, भोगो का सुख उठाते हुए भी संकोच और संयम...

रामायण कालीन सैन्य विज्ञान

आज अधिकांश विद्वान सैन्य विज्ञान को नवीन अध्ययन धारा के रूप में देखते हैं किन्तु, प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में राज्य के सप्तांश की कल्पना की गयी है और उसमें दण्ड व (बल या सेना) का महत्वपूर्ण स्थान है। इस दृष्टि से सैन्य विज्ञान को पुराना ज्ञान कहा जा सकता है, जिसका प्रारम्भ ऋग्वेद से होता है। रामायण कालीन व्यक्तियों को युद्ध कला का ज्ञान था। ”रामायण“ ग्रन्थ के लंका काण्ड में उल्लिखित राम-रावण युद्ध के अतिरिक्त अन्य काण्डों में अनेक युद्धों का उल्लेख मिलता है। जिनमें सैन्य विज्ञान के उद्देश्य, अनुशासन, युद्ध के नियमों, अस्त्र-शस्त्रों, वेतन भत्ता आदि का ज्ञान होता...

कौटिल्य के अर्थशास्त्र में सैन्य विज्ञान

आज अधिकांश विद्वान सैन्य विज्ञान को नवीन अध्ययन धारा के रुप में देखते है किन्तु प्राचीन भारतीय महाकाव्यों, श्रुतियों और स्मृतियों में राज्य के सप्तांग की कल्पना की गयी है। इसमें दण्ड (बल या सेना) का महत्वपूर्ण स्थान है। इस दृष्टि से सैन्य विज्ञान को पुराना ज्ञान कहा जा सकता है जिसका प्रारंभ 'ॠग्वेद' से होता है। 'रामायण और 'महाभारत' युद्ध कला के भण्डार हैं। महाकाव्यों में युद्ध के सैद्धान्तिक और व्यवहारिक पहलू के दर्शन होते हैं। अन्य प्रमुख ग्रन्थों में कौतिल्य का 'अर्थशास्त्र' है जिससे तत्कालीन सैन्य...

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