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| RSS | Friday, September 03, 2010 |
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Reminiscence
Shobha Shukla
Every year, peace loving people all over the world, and more so in Japan , observe 6th August as Hiroshima Day in memory of the millions killed and/ or maimed for life for generations to come.
Hiroshima day is a grim reminder of the dropping of the first atom bomb (ironically named Little Boy), 63 years ago, by the U.S. on the helpless and innocent citizens of Hiroshima . The Uranium bomb detonated at precisely 8.15 am, 2000 feet above the ground surface, turning a beautiful Monday morning into an inferno... एक बच्चा था जिसका नाम राजा था। उसे रोज ५ रूपये का नोट मिलता था। स्कूल के बाहर एक चने बेचने वाली बुढया बैठती थी। राजा उससे रोज ५ रूपये के चने खरीदता था। एक दिन जब राजा ने उससे चने लिये तो उसने चने के साथ ५ रूपये भी वापस कर दिये। शायद उसने समझा कि ५ रूपये के नोट के स्थान पर १० रूपये का नोट था या फिर उस दिन चना खरीदने वालो की भीड ज्यादा थी। इस वजह से उससे गलती हो गई। राजा ५ रूपये पाकर बहुत खुश हुआ और मम्मी के हाथ... संदर्भः जयन्ती २३ जनवरी २००८
-- डॉ. दीपक आचार्य
बांसवाडा के साहित्यकाश में उदित होकर अपनी रचनाओं की चमक-दमक के साथ देश के साहित्य जगत में खासी भूमिका निभाने वाले मणि बावरा वागड अंचल के उन साहित्यकारों में रहे हैं जिन्हें अग्रणी पंक्ति का सूत्रधार माना जा सकता है।
यशस्वी साहित्यकार मणि बावरा उस शख्सयत का नाम रहा है जिसने जीवन संघर्षों और परिवेशीय विषमताओं के बावजूद साहित्य जगत की सेवा की और बांसवाडा में साहित्य धाराओं को परिपुष्ट किया। इसके साथ ही अच्छे कवि के रूप में बांसवाडा और बांसवाडा... बीकानेर की धरती ने जिस निर्भीक, जुझारू और औलिया किस्म के परदुख-कातर जन नेता को जन्म दिया है, वह एकमेव नेता थे जन-जन के हितैषी और लोकप्रिय पं. गोकुल प्रसाद पुरोहित।
पं. शिवरतन जी पुरोहित के इस पुत्र ने कलकत्ता में जन्म लिया था और बंगभूमि के क्रांतिचेता, ऊर्जस्वी वातावरण में पल बढकर उन्होंने स्वतंत्रता, उदात्त मानव प्रेम, समानता और शोषण मुक्त समाज के जीवनदायी आधारभूत तत्वों का बोधपाठ बाल्यकाल में ही अर्जित कर लिया था।
अल्पायु में ही वे देश के स्वाधीनता... - कल्पना डिण्डोर
राजस्थान और राष्ट्रीय राजनीति में दशकों तक आदिवासियों के मसीहा और विकास पुरुष के रूप में पहचाने जाने वाले भीखा भाई ने समाजसेवा, शासन-प्रशासन कौशल और बहुआयामी विकास तथा आदिवासी उत्थान से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में जो ऐतिहासिक कर्मयोग का परिचय दिया है वह युगों तक याद रखा जाएगा।
वागड अंचल के छोटे से गांव बुचिया बडा में जन्मे भीखा भाई ने अपनी प्रतिभा, साहस और अद्भुत मेधावी व्यक्तित्व के साथ देश में अजीम शख्सयत के रूप में जो पहचान बनायी, वह... |
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