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25
Mar
सहनशीलता से फिर दिया आतंकवाद का मुंहतोड जवाब
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तनवीर जाफरी, (सदस्य, हरियाणा साहित्य अकादमी)

13 मई 2008, एक बार फिर भारत के सुप्रसिद्घ पर्यटक स्थल गुलाबी नगरी, जयपुर आतंकवादियों के कहर का पर्याय साबित हुई जबकि मानवता विरोधी आतंकियों ने साम्प्रदायिक सौहार्द्र का प्रतीक समझे जाने वाले जयपुर शहर को सिलसिलेवार बम धमाकों से हिलाकर रख दिया। आतंकवादियों द्वारा 8 अलग-अलग स्थानों पर मात्र 15 मिनट की समय सीमा के भीतर तथा केवल डेढ किलोमीटर की परिधि में यह सभी धमाके किए गए। इन धमाकों में साईकिलों का प्रयोग किया गया। कुल 10 साईकिलें विस्फोट हेतु प्रयोग में लाई गई थीं जिनमें से एक साईकिल में विस्फोट नहीं हो पाया। बताया जा रहा है कि गत् वर्ष मालेगांव तथा उत्तर प्रदेश के लखनऊ, फैजाबाद व बनारस के अदालत परिसरों में हुए धमाकों में भी विस्फोट हेतु इसी प्रकार साईकिलों का ही प्रयोग किया गया था। विस्फोटक को साईकिल पर किसी थैले अथवा टिफिन में रखकर आतंकवादी इन साईकिलों को विस्फोट स्थल तक एक साईकिल सवार के रूप में आसानी से पहुंचा देते हैं। इसके पश्चात इनमें रखी विस्फोटक सामग्री को टाइमर अथवा रिमोट द्वारा विस्फोट कर दिया जाता है। जयपुर में भी ऐसा ही किया गया। परिणामस्वरूप विभिन्न सम्प्रदायों से संबंध रखने वाले 63 बेगुनाह व्यक्ति अपनी जानों से हाथ धो बैठे तथा 150 से अधिक लोग घायल हो गए।

भारत में आतंकवादी घटनाओं का सिलसिला कोई नया नहीं है। कश्मीर के नाम पर चलने वाला आतंकवाद गत् तीन दशकों से तमाम उतार-चढाव व दांव पेच के बीच सक्रिय है। पंजाब भी इस भयानक आतंकित त्रासदी की चपेट में रह चुका है। यहां तक कि अब भी पंजाब आतंकवाद से संबंधित कुछ अलगाववादी संगठनों की सक्रियता के समाचार आते रहते हैं। बोडो, उल्फा, पी डब्ल्यू जी, टी एन एल एफ, एल टी टी ई तथा नक्सलवाद जैसी कितनी ही हिंसक चुनौतियां देने वाले संगठनों का सामना भी हमारा देश गत् कई दशकों से करता चला आ रहा है। परन्तु इन सबके बावजूद इस विशाल भारत में सहिष्णुता, सहनशीलता व सहस्तित्व का परचम हमेशा इतना बुलंद रहा है कि आतंकवाद की घटनाएं हमारे देश की सहिष्णुता जैसी महान विरासत को कभी डगमगा नहीं पाईं। आतंकवादियों द्वारा जान बूझकर बार-बार ऐसे घृणित प्रयोग किए जाते हैं ताकि पूरे देश में साम्प्रदायिक उन्माद की आंधी चले तथा उनके नापाक इरादे कामयाब हों। परन्तु देशवासियों के अपसी सौहार्द्र के परिणामस्वरूप उनकी मंशा कभी पूरी नहीं हो पाती।
जयपुर में हुए सिलसिलेवार विस्फोट भी हालांकि आतंकवादियों की ऐसी ही नापाक कोशिश का एक नतीजा थे। इन विस्फोटों की तफतीश के बाद जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे अत्यन्त गम्भीर व चिंतनीय हैं। इस्लाम के नाम पर फैलने वाला आतंकवाद निःसन्देह इस समय विश्वव्यापी स्तर पर नजर आ रहा है। भले ही इस आतंकवाद के अलग-अलग स्थानों पर अपने अलग-अलग कारण क्यों न हों तथा भले ही इनका एक दूसरे से कोई संबंध हो या न हो परन्तु दूर से देखने में दुनिया को यह सभी ‘इस्लामिक आतंकवाद’ का ही एक चेहरा प्रतीत होता है। विश्वस्तर पर होने वाली इन आतंकवादी घटनाओं में भारत अब तक बडे गर्व से यह कहता रहा है कि वैश्विक स्तर पर फैले इस आतंकवाद में किसी भारतीय आतंकी संगठन अथवा व्यक्ति का कोई योगदान नहीं रहता। परन्तु जयपुर के हादसे के पश्चात जो ई-मेल जांच एजेंसियों को मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुआ है, उसने तो न सिर्फ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है बल्कि भारतीय मुसलमानों के समक्ष भी एक बडी समस्या खडी कर दी है। अभी तक तो भारत में मात्र सिमी (स्टूडेंटस ऑफ इस्लामिक मूवमेंट इन इंडिया) नामक संगठन को ही लेकर यह बहस छिडी रहती थी कि इसके सदस्य आतंकवादी हैं या नहीं। सिमी अपने आप में एक आतंकवादी संगठन है अथवा नहीं तथा सिमी के रिश्ते अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों से जुडे भी हैं या नहीं। परन्तु जयपुर विस्फोट की जिम्मेदारी लेने वाले कथित आतंकवादी संगठन ‘इंडियन मुजाहिद्दीन’ के नाम से जो मेल कथित रूप से गुरुट्ठअल हिंदी की ओर से भेजा गया है, उसने पूरे देश को चिंता में डालकर रख दिया है। यदि यह ई मेल सही है तो इसमें प्रयोग की गई भाषा व चेतावनी इतनी खतरनाक है जिससे कि आतंकवादियों की एक बडी व गहरी साजिश का पर्दाफाश होता है। इस मेल में जहां भारत सरकार को यह चेतावनी दी गई है कि वह अमेरिका के साथ अपने मधुर रिश्ते कायम रखने से परहेज करे, वहीं मेल भेजने वालों ने भारत के मुसलमानों विशेषकर उन मौलवियों की उस ताजातरीन मुहिम को भी ललकारा है, जिसके तहत अब राष्ट्रीय स्तर पर मौलवियों द्वारा संगठित रूप से आतंकवाद की निंदा करने, इसका विरोध करने तथा इसका डटकर मुकाबला करने का आह्वान किया गया है। इस आतंकी संगठन द्वारा आतंकवाद को गैर इस्लामी गतिविधि करार देने वाले इन मौलवियों (इस्लामी धर्मगुरुओं) को ही इस्लाम विरोधी बताया गया है।
यदि यह ई मेल किसी दूसरी बडी साजिश का नतीजा होने के बजाए सच्चाई पर आधारित ई मेल है, फिर तो निश्चित रूप से भारत को इंडियन मुजाहिद्दीन नामक संगठन को लेकर दुनिया में भी शर्मसार होना पड सकता है। दरअसल अब तक पाकिस्तान, बंगलादेश, अफगानिस्तान, सूडान, चेचेन्या आदि देशों को ही इस्लामिक संगठनों की पनाहगाह के रूप में जाना जाता था। परन्तु जयपुर बम धमाकों के बाद पहली बार सुनाई देने वाले इंडियन मुजाहिद्दीन नामक संगठन ने तो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के समक्ष एक चुनौती ही पेश कर दी है। इसमें कोई शक नहीं कि आतंकवादियों का मकसद हमेशा से ही भारत में साम्प्रदायिक सौहार्द्र को चोट पहुंचाना रहा है। परन्तु आतंकवादियों ने चाहे मन्दिर में विस्फोट कर उसे अपवित्र करने का प्रयास किया हो तथा हिन्दू मानस को झकझोरने की कोशिश की हो अथवा मस्जिद, दरगाह या कब्रिस्तान में बेगुनाहों की लाशें बिछाकर मुसलमानों की साम्प्रदायिक भावनाओं को झकझोरने का काम क्यों न किया हो परन्तु आतंकवादियों के प्रत्येक ऐसे नापाक इरादों का भारतीय जनमानस ने हमेशा ही मुंहतोड जवाब दिया है। कहा जा सकता है कि जैसे-जैसे आतंकवादियों के हौसले व उनकी घिनौनी हरकतों के स्तर में वृद्घि होती जा रही है, ठीक उसी प्रकार भारतवासियों की सहनशीलता में भी इजाफा होता जा रहा है। दरअसल पूरा भारत अब आतंकवादियों के प्रत्येक मंसूबे को बखूबी भांप चुका है तथा इनके प्रत्येक प्रहार का जवाब साम्प्रदायिक सौहार्द्र व सहिष्णुता से ही देता आ रहा है जैसा कि जयपूर में गत् दिनों देखने को भी मिला।
इन सबके बावजूद सामूहिक व संगठित रूप से भारतीय मुसलमानों को भी आतंकवादियों के इरादों को समझने तथा उनके विरुद्घ भारत सरकार, राज्य सरकारों तथा सुरक्षा एजेंसियों को पूरा सहयोग देने की जरूरत है। भारतीय मुसलमानों को अपने ऊपर इस कलंक को कतई नहीं लगने देना चाहिए कि कोई भाडे का टट्टू, आतंकवादी अथवा अनजान व्यक्ति किसी भारतीय मुसलमान के यहां पनाह पा रहा है। अथवा उसके घर को मानवता विरोधी साजिशों व गतिविधियों का केंद्र बनाया जा रहा है। सच्चा मुसलमान हरगिज वह नहीं है जो आतंकवाद जैसी इस्लाम विरोधी गतिविधियों में शामिल किसी गुमराह मुसलमान को पनाह दे बल्कि सच्चा मुसलमान वह है जो बेगुनाह लोगों की हत्या होने से लोगों को बचाए तथा ऐसे मानवता विरोधी व इस्लाम विरोधी लोगों की साजिशों को बेनकाब करने में अपनी सहयोगपूर्ण भूमिका अदा करे। 


 

तनवीर जाफरी - tanveerjafri1@gmail.com


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