KhbarExpresswww.khabarexpress.com

Post Your Property free

Welcome Guest Sign In New user! Sign Up Now
Search Photo  
RSS Wednesday, September 08, 2010
4
Nov
सूरतगढ विधानसभा चूनावी चौसर - एक नजर
Add comment    Mail     Print    Write to Editor

- विकास यादव

सूरतगढ, एक महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में नामांकन दाखिल करने  की प्रक्रिया एक सप्ताह बाद शुरू हो जाएगी, लेकिन  दोनों प्रमुख दलों ने अपने उम्मीदवार घोषित नहीं कि है। टिकट को लेकर दोनों दलों में जहां पशो-पेश की स्थिति दिखाई दे रही है, वहीं टिकटार्थियों ने भी सिर-धड की बाजी लगा दी है। हालांकि अगले दो-तीन दिनों में टिकट को लेकर उपजी संशय की स्थिति समाप्त हो जाएगी पर टिकट के महासंग्राम का विजेता कौन होगा? इसे लेकर हर जुबान पर चर्चा सुनी जा सकती है।
राज्य के काफी बडे विधानसभा क्षेत्र को परिसीमन के उपरांत छोटा कर दिया है। जहां घडसाना, रावला, अनूपगढ, श्रीबिजयनगर आदि इलाके की अनूपगढ नई विधानसभा क्षेत्र बना दी गई है, वहीं पीलीबंगा क्षेत्र की 26 ग्राम पंचायतों को सूरतगढ सीट में शामिल कर दिया है। खास बात यह है कि अनूपगढ व पीलीबंगा विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गए हैं। ऐसे में सूरतगढ विधानसभा क्षेत्र पर सभी दिग्गजों की नजरें टिकने के कारण यह सीट काफी महत्वपूर्ण हो गई है। यही कारण है कि दोनों दलों को इस सीट के लिए उम्मीदवार तय करने में काफी जोर रहा है। सूरतगढ सीट के सम्बंध में लिया गया किसी भी तरह का निर्णय पास की अनूपगढ व पीलीबंगा सीट को भी प्रभावित कर रहा है। इसी के चलते आलाकमान सूरतगढ सीट के मामले में काफी फूंक-फूंक कर पैर रख रहा है।
कांग्रेस ने 116 उम्मीदवार घोषित करने के साथ आस-पास की पीलीबंगा व अनूपगढ सीट पर भी अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं, परन्तु सूरतगढ सीट के लिए करीब आधा दर्जन दावेदारों ने अपनी दावेदारी सशक्त कर रही है। हालांकि कांग्रेस को जाट महासभा के समर्थन के बाद गंगाजल मील को यहां से उम्मीदवार बनाया जाना तय है। लेकिन दिल्ली में चर्चा के अनुसार ब्लॉक अध्यक्ष रामनारायण सुथार का नाम सुपर माना जा रहा है। बताया जाता है कि यहां से पूर्व में विधायक रह चुकी श्रीमती विजयलक्ष्मी बिश्नोई एन्टोनी कमेटी की सिफारिशों की शिकार हो चुकी है। अशोक नागपाल से गत चुनाव में करीब 35 हजार मतों से हारने के कारण श्रीमती बिश्नोई  को आलाकमान कहीं से भी उम्मीदवार नहीं बना रहा है।
पता चला है कि श्रीमती बिश्नोई  सहित कुछ दावेदारों ने मील को टिकट मिलती देख वरिष्ठता के आधार पर रामनारायण सुथार को टिकट देने का आग्रह किया था। इसके बाद पैनल में सुथार का नाम और जोड लिया गया। उधर सूत्र बताते हैं कि सूरतगढ सीट पर अंतिम निर्णय हाईकमान  (सोनिया गांधी) को तय करना है। इसलिए यह सीट लगभग गंगाजल मील को मिलना तय माना जा रहा है। टिकट की कतार में लगे किसान नेता राजेन्द्र भादू, बलराम वर्मा, परमजीत सिंह रंधावा  आदि अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में डेरा लगाये हुए हैं। इसी क्रम में भाजपा की टिकट पीलीबंगा विधायक रामप्रताप कासनिया को मिलनी तय मानी जा रही है। कासनिया ने पिछले कई दिनों से वोट मांगने भी शुरू कर दिए हैं। पर दो दिन पूर्व आश्वासन लेकर जयपुर से लौटे भाजपा नगर उपाध्यक्ष शरणपाल सिंह मान द्वारा धुंआधार जनसम्फ शुरू करने से कासनिया की नींद उड गई है।
टिकट को लेकर विधायक अशोक नागपाल पार्टी के पूर्व जिला कोषाध्यक्ष जयप्रकाश सरावगी, पूर्व विधायक स्व. अमरचंद मिड्ढा के पुत्र सुशील मिड्ढा, पूर्व पालिकाध्यक्ष श्रीमती आरती शर्मा, गंगमूल डेयरी के अध्यक्ष पेमाराम सहारण, जिला महामंत्री नरेन्द्र घिंटाला, पूर्व सरपंच श्रीमती लिछमा गेदर जयपुर में अपने साथियों के साथ जमे हुए हैं।
परिसीमन के बाद इस बार स्थानीयता का मुद्दा काफी जोर पकड चुका है और बाहरी उम्मीदवार को काफी विरोध का सामना करना पडेगा। अगर भाजपा ने लोगों की भावना को महत्व देते हुए टिकट दी तो कासनिया की दावेदारी पर तलवार लटक सकती है। शहर में जनसम्फ के दौरान कासनिया के साथ स्थानीय लोगों की संख्या इक्का-दुक्का थी, जबकि इससे ज्यादा स्थानीय भीड तो हर दावेदार के साथ देखी जा जा रही है। शहरी स्तर पर कमजोर दिखाई दे रहे कासनिया की खिलाफत जयपुर में बैठे दावेदार पार्टी नेताओं से कर रहे हैं। जयपुर में स्थानीयता का मुद्दा भी काफी जोर शोर से अन्य दावेदारों द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि अगर यह सीट महिला कोटे में दी जाती है तो आरती शर्मा के भाग्य का छिंका छूट सकता है।
इस बीच मील परिवार से व्यक्तिगत द्वेषता के चलते मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे भी सूरतगढ सीट को लेकर काफी दिलचस्पी ले रही है। कांग्रेस में यहां से गंगाजल मील की संभावित उम्मीदवारी के चलते श्रीमती राजे ऐसे व्यक्ति को यहां से प्रत्याशी बनाना चाहती है जो मील को करारी सशक्त दे सके। राजनीतिक पण्डितों का मानना है कि कांग्रेस अगर गंगाजल मील तथा भाजपा कासनिया को उम्मीदवार बनाती है तो कांग्रेस की टिकट मांग रहे राजेन्द्र भादू भी स्थानीय उम्मीदवार की दुहाई के साथ चुनावी समर में उतर सकते हैं। टिब्बा क्षेत्र में अच्छी पकड रखने वाले भादू दोनों पार्टियों के वोट बैंक में सैंध लगाएंगे। इसके विपरीत भाजपा किसी स्थानीय व्यक्ति को उम्मीदवार बनाती है तो राजनीतिक दलों में भादू की दावेदारी को कमजोर देखा जा रहा है।
उधर पूर्व विधायक गुरुशरण छाबडा भी जनता मोर्चा के प्रत्याशी के रूप में पिछले काफी समय से गांव-गांव, ढाणी-ढाणी में वोट मांग रहे हैं। 1977 में विधायक बने श्री छाबडा पारिवारिक परिस्थितियों के चलते काफ लम्बे समय से जयपुर में रहने लगे हैं। युवा पीढी से परिचित नहीं होने के कारण छाबडा अपने विधायक कार्यकाल में करवाये कार्यों को बताकर सहानुभूति बटोरने की कौशिश कर रहे हैं। बसपा उम्मीदवार बलराम कुक्कडवाल भी प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं।
ऊंट किस करवट बैठेगा यह तो भविष्य के गर्भ में है पर चुनावी चोसर में बाजी मारने के लिए हर दावेदार साम, दाम, दण्ड, भेद की नीति अपनाए हुए हैं।




Discuss this article on KhabarExpress Forum  

Comments to this Article

Be the first to comment on this Article

 Post Your Comments to this Article Posting Rules
Name*:
Comment*:
 
Practice Objective Question for GK
Top Story of The Day
Breaking News
Related Articles
Latest Articles
Artilces
Ready for competition exam - test yourself FREE
All right reserved by Khabarexpress.com
Contact Us | Archives | Sitemap | Can't see Hindi ? | News Ticker
Special Edition: Lakshchandi Mahayagya, Camel Festival 2007, Vartmaan Sahitya, Nagar Ek - Nazaare Anek, Bikaner Udyog Craft Mela
Our Network rajb2b.com | khabarexpress.com | uniqueidea.net | PelagianDictionary.com | hindinotes.com
Developed & Designed by Pelagian Softwares