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RSS Friday, September 03, 2010




Travel & Tourism

बीकानेर में रमणीक व पर्यटन स्थल विकसित होता सूरसागर

बीकानेर  में कभी गंदे पानी व कीचड से भरा रह कर शहर के नासूर के रूप में प्रतिष्ठा पा चुके  ऐतिहासिक जूनागढ किले के पास बने सूर सागर का पुराना वैभव लोटने लगा है। स्वाधीनता दिवस 2008 तक यह तालाब रमणीक व पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो जाएगा। इसके लिए कार्य जोर शोर से चल रहा है। तालाब के समस्त कीचड को निकाल कर सफाई की गई है तथा  सीढयों व बीकानेरी शैली की लाल पत्थर की पाषाण कला के अनुसार चार दीवारी का निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है।

Step towards Conservation of Culture and Heritage

SHEKHAWATI FESTIVAL 2008 SHEKHAWATI Festival, a three-day celebration, in Nawalgarh, Rajasthan, marks the end of Autumn. During the festival, cultural evening swayed away the hearts of the tourists. This festival was organised jointly by M.R. Morarka- GDC Rural Research Foundation, Rajasthan Tourism and District administration of Sikar, Jhunjhunu and Churu. Both local and foreign tourists equally enjoyed the folk music, folk dances, cart race, camel rides, rural sports and fireworks. Musical nights at Sand Dunes near Mukundgarh fort, was the highlight of the festival and added more colours to the already mesmerising days...

जैसलमेर बन रहा है देशी-विदेशी सैलानियों की पहली पसन्द

विश्व पर्यटन मानचित्रा पर विशिष्ट स्थान अर्जित कर चुके ऐतिहासिक जैसलमेर नगर के प्रति देशी-विदेशी सैलानियों का आकर्षण निरन्तर बढता जा रहा है। भारत भ्रमण के लिए आने वाले विदेशी पर्यटक जहां मरुस्थलीय जिले के जन-जीवन तथा विख्यात पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए हमेशा इच्छुक रहते हैं। वहीं देश के कोने-कोने से वर्ष पर्यन्त सैलानियों की स्वर्ण नगरी में आवक बनी रहती है।  प्रारम्भ में विदेशी पर्यटकों में  मुख्यतया फ्रेंन्च पर्यटकों की बहुतायात रहती थी ,किन्तु अब फ्रांस के साथ ही अन्य देशों से इटेलियन, जर्मन, आस्ट्रेलियन, स्विस, अमेरिकन, ब्रिटिश, कोरियन  पर्यटकों के साथ ही...

लोक आस्था का प्रतीक: आस्था धाम कैलादेवी

खबरएक्सप्रेस, ९ मार्च, २००७ लोक आस्था का प्रतीक राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कैलादेवी मेला इस वर्ष १६ मार्च से एक अप्रेल, २००७ तक आयोजित होगा। मेला व्यवस्था मंदिर ट्रस्ट कैलादेवी, ग्राम पंचायत एवं करौली जिला प्रशासन के समन्वित सहयोग से की जाएगी। उत्तर भारत के प्रसिद्ध कैलादेवी मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि वर्तमान में जो कैला ग्राम है वह करौली के यदुवंशी राजाओं के आधिपत्य में आने से पहले गागरोन के खींची राजपूतों के शासन में था। खींचियों के आने से पहले यहां एक छोटा-सा स्थान था जिस...

"LITTLE RAJASTHAN" IN THE HEART OF BUSTLING DELHI

Rajasthan as a state is famous for its rich culture, valour and sights. But , imagine a "little Rajasthan" tucked away in the heart of Delhi - the bustling capital city of India !!  Yes, its true ! Nestled in the busy area of Janpath, is the famous Rajasthan lane. Originally called the Janpath lane, it is now more famous by its colloquial name. Here, one can see and buy all possible artifacts, clothes, jewellery, bedspeads and trinkets from Rajasthan. This place is...

धरोहर संरक्षण की सोच से होगा पर्यटन का विकास

राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष २००६-०७ के अपने बजट में प्रदेश के विभिन्न नगरों के परकोटें एवं नगर द्वार संरक्षण के लिए अलग से योजना प्रारंभ करने, इस प्रयोजनार्थ २ करोड की राशि का प्रावधान किया हैं। पूरा सम्पदा के महत्त्व को देखते हुए पुरातात्विक भवनों एवं पुरा वस्तुओं के संरक्षण एवं विकास हेतु भी पृथक से ’विरासत संरक्षण एवं प्रोत्साहन बोर्ड‘ के गठन की बात बजट में कही गयी हैं। बजट के प्रावधानों को इस रूप में महत्वपूर्ण कहा जा सकता...

विरासत पर्यटन का दूसरा नाम है। बीकानेर

प्रत्येक जिले के प्रशासन द्वारा अपने क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाता है एवं पर्यटन के लिहाज से उसे उस ढांचे मे ढाला जाता है कि वहां पर्यटक आए तथा वह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण  स्थानों में गिना जाय। राजस्थान अपनी वीरता, त्याग आदि के लिए प्रसिद्व रहा है जो पर्यटन के लिहाज से यह भी अति महत्त्वपूर्ण है तथा वे अपने आप में इतने सुन्दर बन पडें हैं कि उनको देखने के लिए पर्यटक का ध्यान बरबस ही उनकी तरफ चला जाता है। इस प्रकार के...

रेगिस्तान में स्वर्ग की यात्राा कराती हवेलियां : एक दास्तान

प्रत्येक जगह की अपनी अस्मिता, अपना गौरव व अपनी किस्म सौन्दर्य बोध होता हैं। कला किसी जातीय परम्परा के परिष्कार का नमूना नहीं होती वरन् कला अपने दुदान्त प्रसा चक्षुओं से ज्ञान व सौन्दर्य अनुकृति का एक ऐसा मार्ग है जिस पर चलते हुए कलाकार अपरिमित आनंद का अनुभव तो करता ही है साथ ही देखने वाले भी उसकी कलात्मकता के कायल होकर अभिभूत हो जाते हैं।  हवेलियां दिल्ली में भी है, जैसलमेर में भी हैं। बीकानेर की हवेलियों से ज्यादा प्रसिद्ध भी है पर...

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